Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.257.27: दुर्योधन सदैव अपने अधीन राजाओं से प्रेम करता था और उत्तम ब्राह्मणों का स्वागत उदारतापूर्वक दान देकर करता था।   |   mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.257.27 
दुर्योधन: प्रिये नित्यं वर्तमानो महीभृताम्।
पूजयामास विप्रेन्द्रान् क्रतुभिर्भूरिदक्षिणै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन सदैव अपने अधीन राजाओं से प्रेम करता था और उत्तम ब्राह्मणों का स्वागत उदारतापूर्वक दान देकर करता था।
 
Duryodhana always loved the kings under his rule and welcomed the best of Brahmins by performing sacrifices with generous offerings. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)