Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.257.10-11h: 'भरतश्रेष्ठ! यह सौभाग्य की बात है कि आपका महान यज्ञ सकुशल संपन्न हो गया। नरश्रेष्ठ! आपके द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ के समाप्त होने पर जब पाण्डव युद्ध में मारे जाएँगे, तब मैं पुनः आपको उसी प्रकार नमस्कार करूँगा। 10 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिष्टॺा ते भरतश्रेष्ठ समाप्तोऽयं महाक्रतु:।
हतेषु युधि पार्थेषु राजसूये तथा त्वया॥ १०॥
आहृतेऽहं नरश्रेष्ठ त्वां सभाजयिता पुन:।
अनुवाद
'भरतश्रेष्ठ! यह सौभाग्य की बात है कि आपका महान यज्ञ सकुशल संपन्न हो गया। नरश्रेष्ठ! आपके द्वारा आयोजित राजसूय यज्ञ के समाप्त होने पर जब पाण्डव युद्ध में मारे जाएँगे, तब मैं पुनः आपको उसी प्रकार नमस्कार करूँगा। 10 1/2॥
‘Bharatshrestha! It is fortunate that your great sacrifice ended safely. Narashrestha! When the Pandavas will be killed in the war, at the end of the Rajsuya Yagya organized by you, I will again greet you in the same way. 10 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥