Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.251.10-12h: वैशम्पायन कहते हैं: हे राजन! शकुनीक के ये वचन सुनकर दुर्योधन ने दुःखी मुख से अपने चरणों में लेटे हुए भाईभक्त और शत्रुओं का नाश करने वाले वीर दु:शासन को देखा और अपनी सुन्दर भुजाओं से उसे उठाकर प्रेमपूर्वक हृदय से लगा लिया और उसका मस्तक सूंघने लगा। | mahabharat अध्याय 3.251: शकुनिके समझानेपर भी दुर्योधनको प्रायोपवेशनसे विचलित होते न देखकर दैत्योंका कृत्याद्वारा उसे रसातलमें बुलाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं: हे राजन! शकुनीक के ये वचन सुनकर दुर्योधन ने दुःखी मुख से अपने चरणों में लेटे हुए भाईभक्त और शत्रुओं का नाश करने वाले वीर दु:शासन को देखा और अपनी सुन्दर भुजाओं से उसे उठाकर प्रेमपूर्वक हृदय से लगा लिया और उसका मस्तक सूंघने लगा।
Vaishmpayana says: O King! On hearing these words of Shakunika, Duryodhan looked at the brave Dushasan, the devotee of brother and destroyer of enemies, lying at his feet with a sad face and raised him with his beautiful arms and lovingly embraced him and smelt his head.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥