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श्लोक 3.250.13  |
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु कर्णेन राजा दुर्योधनस्तदा।
नैवोत्थातुं मनश्चक्रे स्वर्गाय कृतनिश्चय:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! कर्ण की यह बात सुनकर राजा दुर्योधन ने स्वर्ग जाने का निश्चय कर लिया और उस समय वहाँ से उठने का विचार भी नहीं किया। |
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| Vaishmpayana says: O King! Upon hearing Karna say this, King Duryodhan resolved to go to heaven and did not think of getting up at that time. |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि घोषयात्रापर्वणि दुर्योधनप्रायोपवेशे कर्णवाक्ये पञ्चाशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २५०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत घोषयात्रापर्वमें दुर्योधनप्रायोपवेशनके प्रसंगमें कर्णवाक्यसम्बन्धी
दो सौ पचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २५०॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल १३ १/२ श्लोक हैं) |
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