श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.25.16 
सर्वाणि भूतानि नरेन्द्र पश्य
तथा यथावद् विहितं विधात्रा।
स्वयोनित: कर्म सदा चरन्ति
नेशे बलस्येति चरेदधर्मम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे नरेन्द्र! देखो, ये सभी प्राणी सृष्टिकर्ता के विधान के अनुसार सदैव अपनी योनि के अनुसार कर्म करते हैं। अतः तुम स्वयं को शक्ति का स्वामी मानकर पाप मत करो। ॥16॥
 
O Narendra! See, all these creatures always act according to their species as per the law of the Creator. So, do not commit sins thinking yourself to be the master of power. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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