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श्लोक 3.25.16  |
सर्वाणि भूतानि नरेन्द्र पश्य
तथा यथावद् विहितं विधात्रा।
स्वयोनित: कर्म सदा चरन्ति
नेशे बलस्येति चरेदधर्मम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| हे नरेन्द्र! देखो, ये सभी प्राणी सृष्टिकर्ता के विधान के अनुसार सदैव अपनी योनि के अनुसार कर्म करते हैं। अतः तुम स्वयं को शक्ति का स्वामी मानकर पाप मत करो। ॥16॥ |
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| O Narendra! See, all these creatures always act according to their species as per the law of the Creator. So, do not commit sins thinking yourself to be the master of power. ॥16॥ |
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