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mahabharat 3.25.15: कुन्तीपुत्र महाराज युधिष्ठिर! इन महाबली हाथियों को देखो, जो पर्वत शिखरों के समान ऊँचे और बड़े-बड़े दाँतों वाले हैं। ये भी विधाता की आज्ञा का पालन करने में तत्पर हैं। अतः मुझे शक्ति का स्वामी समझकर कभी कोई अधर्म का कार्य नहीं करना चाहिए।॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.25.15 
महाबलान् पर्वतकूटमात्रान्
विषाणिन: पश्य गजान्नरेन्द्र।
स्थितान्निदेशे नरवर्य धातु-
र्नेशे बलस्येति चरेदधर्मम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र महाराज युधिष्ठिर! इन महाबली हाथियों को देखो, जो पर्वत शिखरों के समान ऊँचे और बड़े-बड़े दाँतों वाले हैं। ये भी विधाता की आज्ञा का पालन करने में तत्पर हैं। अतः मुझे शक्ति का स्वामी समझकर कभी कोई अधर्म का कार्य नहीं करना चाहिए।॥15॥
 
Kunti's son Maharaj Yudhishthira! Look at these mighty elephants, who are as tall as mountain peaks and have large teeth. They are also busy following the orders of the Creator. Therefore, thinking that I am the master of power, I should never commit any unrighteous act. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)