श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 25: महर्षि मार्कण्डेयका पाण्डवोंको धर्मका आदेश देकर उत्तर दिशाकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.25.12 
भूपाश्च नाभागभगीरथादयो
महीमिमां सागरान्तां विजित्य।
सत्येन तेऽप्यजयंस्तात लोकान्
नेशे बलस्येति चरेदधर्मम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नाभाग और भगीरथ जैसे राजाओं ने भी समुद्र पर्यन्त पृथ्वी को जीत लिया और सत्य के द्वारा ही उत्तम लोकों को जीत लिया। अतः हे प्रिय! अपने को बल का स्वामी मानकर अधर्म का आचरण नहीं करना चाहिए॥12॥
 
Kings like Nabhag and Bhagirath also conquered the earth up to the sea and conquered the best worlds through truth. Therefore, dear one, one should not act unrighteously considering oneself to be the master of power.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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