श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 247: सेनासहित दुर्योधनका मार्गमें ठहरना और कर्णके द्वारा उसका अभिनन्दन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.247.9-10 
उपागम्याब्रवीत् कर्णो दुर्योधनमिदं तदा॥ ९॥
दिष्टॺा जीवसि गान्धारे दिष्टॺा न: सङ्गम: पुन:।
दिष्टॺा त्वया जिताश्चैव गन्धर्वा: कामरूपिण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय कर्ण ने पास आकर दुर्योधन से इस प्रकार कहा- 'गान्धारीनन्दन! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आप जीवित हैं। सौभाग्य से हम पुनः एक-दूसरे से मिले हैं। सौभाग्य से आपने इच्छानुसार रूप धारण करने वाले गन्धर्वों को जीत लिया है, यह और भी अधिक प्रसन्नता की बात है॥9-10॥
 
At that time Karna came near and said to Duryodhan in this manner- 'Gandharinandan! It is a matter of great fortune that you are alive. Fortunately we have met each other again. Fortunately you have conquered the Gandharvas who take any form as per their wish, this is a matter of even more happiness.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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