श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 247: सेनासहित दुर्योधनका मार्गमें ठहरना और कर्णके द्वारा उसका अभिनन्दन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.247.15 
नैतस्य कर्ता लोकेऽस्मिन् पुमान् भारत विद्यते।
यत् कृतं ते महाराज सह भ्रातृभिराहवे॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन महाराज! आपने और आपके भाइयों ने इस युद्ध में जो पराक्रम दिखाया है, वैसा इस संसार में किसी ने नहीं दिखाया।॥15॥
 
Bharatanandan Maharaj! The valour you and your brothers have displayed in this war is like no other person in this world.'॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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