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mahabharat 3.246.d1-18: तत्पश्चात् चित्रसेन ने गन्धर्वों के साथ देवलोक में पहुँचकर देवराज इन्द्र को सारा समाचार सुनाया और युद्ध में कौरवों द्वारा मारे गए समस्त गन्धर्वों को दिव्य अमृत की वर्षा करके देवराज इन्द्र ने जीवित कर दिया॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक d1-18
 
 
श्लोक  3.246.d1-18 
(देवलोकं ततो गत्वा गन्धर्वै: सहितस्तदा।
न्यवेदयच्च तत् सर्वं चित्रसेन: शतक्रतो:॥ )
देवराडपि गन्धर्वान् मृतांस्तान् समजीवयत्।
दिव्येनामृतवर्षेण ये हता: कौरवैर्युधि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चित्रसेन ने गन्धर्वों के साथ देवलोक में पहुँचकर देवराज इन्द्र को सारा समाचार सुनाया और युद्ध में कौरवों द्वारा मारे गए समस्त गन्धर्वों को दिव्य अमृत की वर्षा करके देवराज इन्द्र ने जीवित कर दिया॥18॥
 
Thereafter, Chitrasena along with the Gandharvas reached the world of gods and presented all the news to Lord Indra. Devraj Indra revived all the Gandharvas who were killed by the Kauravas in the war by showering them with divine nectar. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)