Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.246.19-20: इस प्रकार अपने समस्त भाइयों तथा राजपरिवार की स्त्रियों को गन्धर्वों से छुड़ाकर तथा कठिन पराक्रम करके प्रसन्न होकर महामना पाण्डवों के पराक्रमी योद्धा अपनी स्त्रियों तथा बच्चों सहित कौरवों द्वारा पूजित तथा स्तुति किये जा रहे थे तथा यज्ञवेदी में प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.246.19-20 
ज्ञातींस्तानवमुच्याथ राजदारांश्च सर्वश:।
कृत्वा च दुष्करं कर्म प्रीतियुक्ताश्च पाण्डवा:॥ १९॥
सस्त्रीकुमारै: कुरुभि: पूज्यमाना महारथा:।
बभ्राजिरे महात्मान: क्रतुमध्ये यथाग्नय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने समस्त भाइयों तथा राजपरिवार की स्त्रियों को गन्धर्वों से छुड़ाकर तथा कठिन पराक्रम करके प्रसन्न होकर महामना पाण्डवों के पराक्रमी योद्धा अपनी स्त्रियों तथा बच्चों सहित कौरवों द्वारा पूजित तथा स्तुति किये जा रहे थे तथा यज्ञवेदी में प्रज्वलित अग्नि के समान चमक रहे थे।
 
Thus, happy after having rescued all their brothers and the women of the royal family from the Gandharvas and having performed difficult feats, the mighty warriors of Mahamana Pandavas, along with their women and children, were being worshipped and praised by the Kauravas, and were shining like the blazing fires in the sacrificial altar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)