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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 246: चित्रसेन, अर्जुन तथा युधिष्ठिरका संवाद और दुर्योधनका छुटकारा
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श्लोक 17
श्लोक
3.246.17
अनुज्ञातास्तु गन्धर्वा: पाण्डुपुत्रेण धीमता।
सहाप्सरोभि: संहृष्टाश्चित्रसेनमुखा ययु:॥ १७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर की आज्ञा पाकर बुद्धिमान पाण्डुपुत्र चित्रसेन तथा समस्त गन्धर्व और अप्सराएँ प्रसन्नतापूर्वक वहाँ से चले गए ॥17॥
Taking orders from Yudhishthira, the wise son of Pandu, Chitrasena and all the Gandharvas and Apsaras happily departed from there. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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