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mahabharat 3.241.11-12h: धृतराष्ट्र के समस्त पुत्रों को युद्ध से भागते हुए देखकर भी राधानन्दन वीर कर्ण ने वहाँ से मुँह नहीं मोड़ा।   |   mahabharat अध्याय 3.241: कौरवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध और कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 241: कौरवोंका गन्धर्वोंके साथ युद्ध और कर्णकी पराजय  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  3.241.11-12h 
तान् दृष्ट्वा द्रवत: सर्वान् धार्तराष्ट्रान् पराङ्मुखान्॥ ११॥
राधेयस्तु तदा वीरो नासीत् तत्र पराङ्मुख:।
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र के समस्त पुत्रों को युद्ध से भागते हुए देखकर भी राधानन्दन वीर कर्ण ने वहाँ से मुँह नहीं मोड़ा।
 
Even after seeing all the sons of Dhritarashtra running away from the war, Radhanandan brave Karna did not turn his back there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)