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mahabharat 3.239.23: धृतराष्ट्र की अनुमति पाकर गांधारीपुत्र भरतश्रेष्ठ दुर्योधन कर्ण और विशाल सेना के साथ नगर से बाहर चला गया।   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.239.23 
अनुज्ञातस्तु गान्धारि: कर्णेन सहितस्तदा।
निर्ययौ भरतश्रेष्ठो बलेन महता वृत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र की अनुमति पाकर गांधारीपुत्र भरतश्रेष्ठ दुर्योधन कर्ण और विशाल सेना के साथ नगर से बाहर चला गया।
 
After receiving Dhritarashtra's permission, Gandhari's son, the best of the Bharatas, Duryodhana, along with Karna and a huge army, left the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)