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mahabharat 3.239.2: उन्होंने समंग नामक एक ग्वाले को पहले ही प्रशिक्षित और प्रशिक्षित कर लिया था। उसने राजा धृतराष्ट्र से निवेदन किया कि 'महाराज! इन दिनों आपकी गायें मेरे पास आ गई हैं।'॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.239.2 
ततस्तैर्विहित: पूर्वं समङ्गो नाम बल्लव:।
समीपस्थास्तदा गावो धृतराष्ट्रे न्यवेदयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने समंग नामक एक ग्वाले को पहले ही प्रशिक्षित और प्रशिक्षित कर लिया था। उसने राजा धृतराष्ट्र से निवेदन किया कि 'महाराज! इन दिनों आपकी गायें मेरे पास आ गई हैं।'॥ 2॥
 
They had already trained and trained a cowherd named Samang. He requested King Dhritarashtra that 'Maharaj! These days your cows have come near me.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)