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mahabharat 3.239.19: अन्य पाण्डव भी धर्म के अनुयायी हैं, इसलिए वे सब युधिष्ठिर का अनुसरण करते हैं। कुंतीपुत्र युधिष्ठिर हम पर कभी क्रोधित नहीं होंगे।   |   mahabharat अध्याय 3.239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 239: कर्ण आदिके द्वारा द्वैतवनमें जानेका प्रस्ताव, राजा धृतराष्ट्रकी अस्वीकृति, शकुनिका समझाना, धृतराष्ट्रका अनुमति देना तथा दुर्योधनका प्रस्थान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.239.19 
अनुवृत्ताश्च ते सर्वे पाण्डवा धर्मचारिण:।
युधिष्ठिरस्तु कौन्तेयो न न: कोपं करिष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अन्य पाण्डव भी धर्म के अनुयायी हैं, इसलिए वे सब युधिष्ठिर का अनुसरण करते हैं। कुंतीपुत्र युधिष्ठिर हम पर कभी क्रोधित नहीं होंगे।
 
The other Pandavas too are followers of Dharma; hence all of them follow Yudhishthira. Kunti's son Yudhishthira will never get angry with us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)