श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 235: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.235.5 
न ह्येवं शीलसम्पन्ना नैवं पूजितलक्षणा:।
प्राप्नुवन्ति चिरं क्लेशं यथा त्वमसितेक्षणे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्यामलोचना! तुम्हें जो कष्ट सहना पड़ा है, वह तुम्हारे समान सद्गुणी स्त्रियों को अधिक समय तक नहीं सहना पड़ता।॥5॥
 
Shyamlochana! The kind of suffering you have had to endure, ladies with good qualities like you do not have to endure it for long. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)