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mahabharat 3.235.16-17: "भामिनी! ये सभी तथा प्रद्युम्न भी आपके पुत्रों के प्रति समान प्रेम रखते हैं।" ऐसी मधुर, सच्ची तथा हृदय को प्रसन्न करने वाली बातें कहकर श्रीकृष्ण की रानी सत्यभामा ने अपने स्वामी के रथ की ओर जाने का निश्चय किया और द्रौपदी के चारों ओर परिक्रमा की।   |   mahabharat अध्याय 3.235: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 235: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  3.235.16-17 
तुल्यो हि प्रणयस्तेषां प्रद्युम्नस्य च भाविनि।
एवमादि प्रियं सत्यं हृद्यमुक्त्वा मनोऽनुगम्॥ १६॥
गमनाय मनश्चक्रे वासुदेवरथं प्रति।
तां कृष्णां कृष्णमहिषी चकाराभिप्रदक्षिणम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
"भामिनी! ये सभी तथा प्रद्युम्न भी आपके पुत्रों के प्रति समान प्रेम रखते हैं।" ऐसी मधुर, सच्ची तथा हृदय को प्रसन्न करने वाली बातें कहकर श्रीकृष्ण की रानी सत्यभामा ने अपने स्वामी के रथ की ओर जाने का निश्चय किया और द्रौपदी के चारों ओर परिक्रमा की।
 
"Bhamini! All of them and Pradyumna too have equal love for your sons." Having said such sweet, true and agreeable words to the heart, Satyabhama, the queen of Krishna, decided to go towards her master's chariot and circled around Draupadi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)