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mahabharat 3.235.10-11: 'युधिष्ठिरकुमार प्रतिविन्ध्य, भीमसेनन्दन सुतसोम, अर्जुनकुमार श्रुतकर्मा, नकुलनन्दन शतानीक तथा सहदेवकुमार श्रुतसेन- आपके ये सभी वीर पुत्र शस्त्र विद्या में निपुण हो गये हैं और द्वारकापुरी में कुशलतापूर्वक रहते हैं। 10-11॥   |   mahabharat अध्याय 3.235: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 235: सत्यभामाका द्रौपदीको आश्वासन देकर श्रीकृष्णके साथ द्वारकाको प्रस्थान  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  3.235.10-11 
पुत्रस्ते प्रतिविन्ध्यश्च सुतसोमस्तथाविध:।
श्रुतकर्मार्जुनिश्चैव शतानीकश्च नाकुलि:॥ १०॥
सहदेवाच्च यो जात: श्रुतसेनस्तवात्मज:।
सर्वे कुशलिनो वीरा: कृतास्त्राश्च सुतास्तव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'युधिष्ठिरकुमार प्रतिविन्ध्य, भीमसेनन्दन सुतसोम, अर्जुनकुमार श्रुतकर्मा, नकुलनन्दन शतानीक तथा सहदेवकुमार श्रुतसेन- आपके ये सभी वीर पुत्र शस्त्र विद्या में निपुण हो गये हैं और द्वारकापुरी में कुशलतापूर्वक रहते हैं। 10-11॥
 
‘Yudhishthirkumar Prativindhya, Bhimsenandan Sutasom, Arjunkumar Shrutkarma, Nakulnandan Satanik and Sahadevkumar Shrutsen – all these brave sons of yours have become adept in the art of weapons and live efficiently in Dwarkapuri. 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)