Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.234.2: सच! स्त्रियों के लिए देवताओं सहित सम्पूर्ण जगत में पति के समान कोई दूसरा देवता नहीं है। पति के आशीर्वाद से स्त्री की सभी इच्छाएँ पूरी हो सकती हैं और यदि पति रुष्ट हो जाए तो वह स्त्री की समस्त आशाओं को नष्ट कर सकता है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.234.2 
नैतादृशं दैवतमस्ति सत्ये
सर्वेषु लोकेषु सदेवकेषु।
यथा पतिस्तस्य तु सर्वकामा
लभ्या: प्रसादात् कुपितश्च हन्यात्॥ २॥
 
 
अनुवाद
सच! स्त्रियों के लिए देवताओं सहित सम्पूर्ण जगत में पति के समान कोई दूसरा देवता नहीं है। पति के आशीर्वाद से स्त्री की सभी इच्छाएँ पूरी हो सकती हैं और यदि पति रुष्ट हो जाए तो वह स्त्री की समस्त आशाओं को नष्ट कर सकता है॥ 2॥
 
True! For women, there is no other god like husband in the entire world including the gods. All the desires of a woman can be fulfilled by the blessings of her husband, and if the husband gets angry, he can destroy all the hopes of the woman.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)