Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.234.12: तुम बहुमूल्य हार, आभूषण और श्रृंगार सामग्री धारण करके तथा पवित्र सुगंधियों से सुगन्धित होकर अपने प्रियतम श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण का पूजन करो। इससे तुम्हारा यश और कीर्ति बढ़ेगी। तुम्हारी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी और तुम्हारे शत्रुओं का नाश होगा। 12॥ | mahabharat अध्याय 3.234: पतिदेवको अनुकूल करनेका उपाय—पतिकी अनन्यभावसे सेवा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतद् यशस्यं भगदैवतं च
स्वार्थ्यं तथा शत्रुनिबर्हणं च।
महार्हमाल्याभरणाङ्गरागा
भर्तारमाराधय पुण्यगन्धा॥ १२॥
अनुवाद
तुम बहुमूल्य हार, आभूषण और श्रृंगार सामग्री धारण करके तथा पवित्र सुगंधियों से सुगन्धित होकर अपने प्रियतम श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण का पूजन करो। इससे तुम्हारा यश और कीर्ति बढ़ेगी। तुम्हारी मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी और तुम्हारे शत्रुओं का नाश होगा। 12॥
You, wearing expensive necklaces, jewelery and cosmetics and perfumed with sacred fragrances, worship your beloved Shyamsundar Shri Krishna. This will increase your fame and fortune. Your wishes will be fulfilled and your enemies will be destroyed. 12॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीसत्यभामासंवादपर्वणि द्रौपदीकर्तव्यकथने चतुस्त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीसत्यभामासंवादपर्वमें द्रौपदीद्वारा स्त्रीकर्तव्यकथनविषयक दो सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥