Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.232.3-9: मार्कण्डेयजी ने कहा- राजन! आग्नेय, स्कंद, दीप्तकीर्ति, अनामय, मयूरकेतु, धर्मात्मा, भूतेश, महिषमर्दन, कामजित, कामद, कांत, सत्यवाक्, भुवनेश्वर, शिशु, शीघ्र, शुचि, चंड, दीप्तवर्ण, शुभानन, अमोघ, अनघ, रौद्र, प्रिया, चंद्रानन, दीप्तशक्ति, प्रशांतात्मा, भद्रकृत, कूटमोहन, षस्तिप्रिय, धर्मात्मा, पवित्र। मातृवत्सल, कन्याभारत, विभक्त, स्वाहेय, रेवतीसुत, प्रभु, नेता, विशाख, नैगमेय, सुदुष्चर, सुव्रत, ललित, बाल-कृदानप्रिय, आकाशचारी, ब्रह्मचारी, शूर, शंखनोद्भव, विश्वामित्रप्रिय, देवसेनाप्रिय, वासुदेवप्रिय, प्रिया और प्रियाकृत- ये कार्तिकेयजी के दिव्य नाम हैं। जो मनुष्य इनका पाठ करता है, उसे धन, यश और स्वर्ग की प्राप्ति होती है; इसमें कोई संदेह नहीं है। 3-9। | mahabharat अध्याय 3.232: कार्तिकेयके प्रसिद्ध नामोंका वर्णन तथा उनका स्तवन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मार्कण्डेयजी ने कहा- राजन! आग्नेय, स्कंद, दीप्तकीर्ति, अनामय, मयूरकेतु, धर्मात्मा, भूतेश, महिषमर्दन, कामजित, कामद, कांत, सत्यवाक्, भुवनेश्वर, शिशु, शीघ्र, शुचि, चंड, दीप्तवर्ण, शुभानन, अमोघ, अनघ, रौद्र, प्रिया, चंद्रानन, दीप्तशक्ति, प्रशांतात्मा, भद्रकृत, कूटमोहन, षस्तिप्रिय, धर्मात्मा, पवित्र। मातृवत्सल, कन्याभारत, विभक्त, स्वाहेय, रेवतीसुत, प्रभु, नेता, विशाख, नैगमेय, सुदुष्चर, सुव्रत, ललित, बाल-कृदानप्रिय, आकाशचारी, ब्रह्मचारी, शूर, शंखनोद्भव, विश्वामित्रप्रिय, देवसेनाप्रिय, वासुदेवप्रिय, प्रिया और प्रियाकृत- ये कार्तिकेयजी के दिव्य नाम हैं। जो मनुष्य इनका पाठ करता है, उसे धन, यश और स्वर्ग की प्राप्ति होती है; इसमें कोई संदेह नहीं है। 3-9।
Markandeyaji said- Rajan! Aagneya, Skanda, Deeptakirti, Anamay, Mayurketu, Dharmatma, Bhutesh, Mahishmardan, Kamjit, Kamad, Kant, Satyavak, Bhuvaneshwar, Shishu, Speedy, Shuchi, Chand, Deeptavarna, Shubhanana, Amogh, Anagha, Raudra, Priya, Chandranan, Diptashakti, Prashantatma, Bhadrakrit, Kootamohan, Shastipriya, Dharmatma, Pious, Matravatsal, Kanyabharta, Vibhakt, Swaheya, Revatisut, Prabhu, Neta, Vishakh, Naigameya, Sudushchar, Suvrata, Lalit, Bal-Kridanapriya, Akashchari, Brahmachari, Shur, Shankhanodbhava, Vishwamitrapriya, Devsenapriya, Vasudevpriya, Priya and Priyakrit - these are the divine names of Kartikeyaji. One who recites these attains wealth, fame and heaven; there is no doubt about this. 3-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥