व्याप्तं जगत् सर्वसुरप्रवीर
शक्त्या मया संस्तुत लोकनाथ।
नमोऽस्तु ते द्वादशनेत्रबाहो
अत: परं वेद्मि गतिं न तेऽहम्॥ १९॥
अनुवाद
हे देवों के वीर शिरोमणि! यह सम्पूर्ण जगत् आपकी शक्ति से व्याप्त है। लोकनाथ! मैंने अपनी शक्ति से आपकी स्तुति की है। हे बारह नेत्रों और भुजाओं से विभूषित देव! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। इससे परे मैं आपके स्वरूप को नहीं जानता॥19॥
O brave chief of all the gods! This entire universe is pervaded by your power. Loknath! I have praised you to the best of my ability. O god adorned with twelve eyes and arms! I salute you. I do not know your form beyond this.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥