श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 228: स्कन्दके पार्षदोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.228.15 
इत्येतद् विविधाकारं वृत्तं शुक्लस्य पञ्चमीम्।
तत्र युद्धं महाघोरं वृत्तं षष्ठॺां जनाधिप॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाना प्रकार के साथी उत्पन्न हुए और छठे दिन वहाँ अत्यन्त भयंकर युद्ध हुआ॥15॥
 
O Lord of men! In this manner, on the fifth day of the bright half, various kinds of companions were created and on the sixth day a very fierce battle took place there.॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसे कुमारोत्पत्तौ अष्टाविंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानके प्रसंगमें कुमारोत्पत्तिविषयक दो सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)