श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.227.7 
विनदन् पार्थ देवेशो द्रुतं याति महाबल:।
संहर्षयन् देवसेनां जिघांसु: पावकात्मजम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! महाबली देवराज इन्द्र अग्निनन्दन स्कन्द को मारने की इच्छा से देवताओं की सेना का हर्ष बढ़ाते हुए भयंकर गर्जना करते हुए तीव्र गति से आगे बढ़ रहे थे॥7॥
 
Yudhisthira! The mighty king of gods, Indra, with the desire to kill Agninandan Skanda, was moving forward at a fast speed with a terrible roar, increasing the joy of the army of gods. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)