Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.227.11: जब अग्निकुमार स्कन्द ने देखा कि देवतागण मुझे मारने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं, तब वे क्रोधित हो उठे और अपने मुख से निरन्तर बढ़ती हुई ज्वालाएँ उगलने लगे ॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.227: पराजित होकर शरणमें आये हुए इन्द्रसहित देवताओंको स्कन्दका अभयदान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब अग्निकुमार स्कन्द ने देखा कि देवतागण मुझे मारने के लिए यहाँ एकत्र हुए हैं, तब वे क्रोधित हो उठे और अपने मुख से निरन्तर बढ़ती हुई ज्वालाएँ उगलने लगे ॥11॥
When Agnikumar Skanda saw that the gods had gathered here to kill him, he became enraged and began spewing ever-increasing flames from his mouth. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥