vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 225: स्वाहाका मुनिपत्नियोंके रूपोंमें अग्निके साथ समागम, स्कन्दकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा क्रौंच आदि पर्वतोंका विदारण
»
श्लोक 33
श्लोक
3.225.33
बिभेद स शरै: शैलं क्रौञ्चं हिमवत: सुतम्।
तेन हंसाश्च गृध्राश्च मेरुं गच्छन्ति पर्वतम्॥ ३३॥
अनुवाद
उन बाणों से उसने हिमालयपुत्र क्रौंच पर्वत को छिन्न-भिन्न कर दिया। उसी छिद्र से होकर हंस और गीध मेरु पर्वत पर जाते हैं ॥33॥
With those arrows he disintegrated Mount Krauncha, the son of Himalaya. Through the same hole, swans and vultures go to Mount Meru. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×