Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.224.34: तब उसने मन ही मन सोचा, 'मेरा यह कार्य बिलकुल उचित नहीं है। मेरे मन में एक विचार आया है। इन ब्रह्मर्षियों की पत्नियाँ अपने पतिव्रता हैं। वे मुझे बिल्कुल नहीं चाहतीं, फिर भी मैं उन्हें चाहता हूँ॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 3.224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब उसने मन ही मन सोचा, 'मेरा यह कार्य बिलकुल उचित नहीं है। मेरे मन में एक विचार आया है। इन ब्रह्मर्षियों की पत्नियाँ अपने पतिव्रता हैं। वे मुझे बिल्कुल नहीं चाहतीं, फिर भी मैं उन्हें चाहता हूँ॥ 34॥
Then he thought to himself, 'This act of mine is not at all right. A thought has come to my mind. The wives of these brahmarshis are faithful to their husbands. They do not want me at all, yet I desire them.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥