vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन
»
श्लोक 27-28h
श्लोक
3.224.27-28h
इष्टिं कृत्वा यथान्यायं सुसमिद्धे हुताशने॥ २७॥
जुहुवुस्ते महात्मानो हव्यं सर्वदिवौकसाम्।
अनुवाद
उन महात्मा ऋषियों ने शास्त्रीय विधि से जलती हुई अग्नि में इष्टिका संपन्न की और समस्त देवताओं को हविष्य अर्पित किया ॥27 1/2॥
Those Mahatma Rishis performed Ishtikha in the burning fire in the classical method and offered Havishya to all the Gods. 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×