श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.224.19 
एष रौद्रश्च सङ्घातो महान् युक्तश्च तेजसा।
सोमस्य वह्निसूर्याभ्यामद्‍भुतोऽयं समागम:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अनेक योगों का यह भयंकर एवं महान् संयोग तेज से प्रकाशित हो रहा है। अग्नि और सूर्य के साथ चन्द्रमा का यह अद्भुत संयोग दर्शनीय है।
 
This terrible and great union of many yogas is being illuminated with brilliance. This wonderful union of the moon with the fire and the sun is visible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)