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mahabharat 3.224.12: अमावस्या की रात्रि आरम्भ हो चुकी थी। उस भीषण क्षण में उन्होंने उदयगिरि के शिखर पर देवताओं और दानवों के मध्य युद्ध के चिह्न देखे॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.224: इन्द्रका देवसेनाके साथ ब्रह्माजीके पास तथा ब्रह्मर्षियोंके आश्रमपर जाना, अग्निका मोह और वनगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.224.12 
अमावास्यां प्रवृत्तायां मुहूर्ते रौद्र एव तु।
देवासुरं च संग्रामं सोऽपश्यदुदये गिरौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अमावस्या की रात्रि आरम्भ हो चुकी थी। उस भीषण क्षण में उन्होंने उदयगिरि के शिखर पर देवताओं और दानवों के मध्य युद्ध के चिह्न देखे॥12॥
 
The new moon night had begun. In that fierce moment, he saw the signs of a war between gods and demons on the peak of Udayagiri.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)