श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 222: सह नामक अग्निका जलमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्वारा पुन: उनका प्राकटॺ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.222.2 
भूतानां चापि सर्वेषां यं प्राहु: पावकं पतिम्।
आत्मा भुवनभर्तेति सान्वयेषु द्विजातिषु॥ २॥
 
 
अनुवाद
सभी ब्राह्मण कुल-परम्परा से यही मानते और कहते हैं कि 'अद्भुत' नामक अग्नि ही सब प्राणियों का स्वामी है। वही सबका आत्मा और जगत का रक्षक है॥2॥
 
All Brahmins, from lineage to lineage, believe and say that the fire named 'Adbhut' is the lord of all beings. He is the soul of all and the protector of the universe.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)