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mahabharat 3.220.8: उन्होंने अपनी दोनों भुजाओं से प्राकृत और वैकृत दोनों प्रकार के अनुदात्तों, मन और इन्द्रियों के समस्त (छः) देवताओं और पंच महाभूतों को उत्पन्न किया। इन सबको उत्पन्न करने के पश्चात् उन्होंने पाँच पितरों के लिए पाँच और पुत्र उत्पन्न किए। 8॥   |   mahabharat अध्याय 3.220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.220.8 
बाहुभ्यामनुदात्तौ च विश्वे भूतानि चैव ह।
एतान् सृष्ट्वा तत: पञ्च पितॄणामसृजत् सुतान्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपनी दोनों भुजाओं से प्राकृत और वैकृत दोनों प्रकार के अनुदात्तों, मन और इन्द्रियों के समस्त (छः) देवताओं और पंच महाभूतों को उत्पन्न किया। इन सबको उत्पन्न करने के पश्चात् उन्होंने पाँच पितरों के लिए पाँच और पुत्र उत्पन्न किए। 8॥
 
From both the arms, he created both Prakrit and Vaikrit types of Anudattas, all the (six) deities of mind and sense organs and the five Mahabhutas. After creating all these, he created five more sons for the five ancestors. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)