Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.220.19-20: यजुर्वेदी विद्वानों का मत है कि तप के पुत्र रथन्तर नामक अग्नि को दिया गया यज्ञ मित्रविन्द देवता का अंश है। वह महातपस्वी (पांचजन्य) अपने समस्त पुत्रों सहित परम सुखी और आनंदित रहता है। 19-20॥   |   mahabharat अध्याय 3.220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.220.19-20 
रथन्तरश्च तपस: पुत्रोऽग्नि: परिपठॺते।
मित्रविन्दाय वै तस्य हविरध्वर्यवो विदु:॥ १९॥
मुमुदे परमप्रीत: सह पुत्रैर्महायशा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यजुर्वेदी विद्वानों का मत है कि तप के पुत्र रथन्तर नामक अग्नि को दिया गया यज्ञ मित्रविन्द देवता का अंश है। वह महातपस्वी (पांचजन्य) अपने समस्त पुत्रों सहित परम सुखी और आनंदित रहता है। 19-20॥
 
Yajurvedi scholars believe that the sacrifice given to the son of Tapa, who is called Agni named Rathantar, is a part of Mitravind Devta. The great penance (Panchjanya) along with all his sons remain extremely happy and blissful. 19-20॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसोपाख्याने विंशत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २२०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्मानविषयक

दो सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २२०॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)