Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.220.10-11: अनुदात्त का जन्म जीवन के अंश से हुआ। इस प्रकार पच्चीस पुत्रों के नाम प्रकट हुए। तत्पश्चात् 'तप' नामक पाञ्चजन्य ने यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करने वाले अन्य पंद्रह उत्तर देवताओं (विनायकों) की सृष्टि की। उनका वर्णन इस प्रकार है - सुभिम, अतिभिम, भीम, भीमबल और अबल - उसने प्रथम पाँच विनायक उत्पन्न किए, जो देवताओं के यज्ञ का विध्वंस करने वाले हैं। 10-11॥ | mahabharat अध्याय 3.220: पाञ्चजन्य अग्निकी उत्पत्ति तथा उसकी संततिका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनुदात्त का जन्म जीवन के अंश से हुआ। इस प्रकार पच्चीस पुत्रों के नाम प्रकट हुए। तत्पश्चात् 'तप' नामक पाञ्चजन्य ने यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करने वाले अन्य पंद्रह उत्तर देवताओं (विनायकों) की सृष्टि की। उनका वर्णन इस प्रकार है - सुभिम, अतिभिम, भीम, भीमबल और अबल - उसने प्रथम पाँच विनायक उत्पन्न किए, जो देवताओं के यज्ञ का विध्वंस करने वाले हैं। 10-11॥
Anudatta was born from a part of life. In this way the names of twenty-five sons were revealed. After that, Panchjanya, named 'Tapa', created fifteen other North Gods (Vinayaks) who created obstacles in the Yagya. His description is as follows - Subhim, Atibhim, Bhim, Bhimbal and Abal - he created the first five Vinayakas, who are the ones who destroy the yagya of the gods. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥