श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 218: अंगिराकी संततिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.218.8 
यां तु दृष्ट्वा भगवतीं जन: कुहुकुहायते।
एकानंशेति तामाहु: कुहूमङ्गिरस: सुताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जिन देवी अमा को देखकर लोग 'कुहु-कुहु' (आश्चर्य) करने लगते हैं, वे अंगिरा ऋषि की आठवीं पुत्री 'कुहु' नाम से प्रसिद्ध हैं। उनमें चन्द्रमा की कला का बहुत थोड़ा-सा अंश ही शेष रहता है। (यह शुद्ध अमावस्या है)॥8॥
 
The goddess Ama, on seeing whom people start making the sound 'kuhu-kuhu' (get surprised), that eighth daughter of sage Angira is famous by the name 'Kuhu'. In her only a very small part of the phase of the moon remains. (This is the pure Amavasya)॥ 8॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि अङ्गिरसोपाख्यानेअष्टादशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें अंगिरसोपाख्यानविषयक

दो सौ अठारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)