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श्लोक 3.217.19  |
ज्ञात्वा प्रथमजं तं तु वह्नेराङ्गिरसं सुतम्।
उपेत्य देवा: पप्रच्छु: कारणं तत्र भारत॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| भरतनन्दन! अंगिरा को अग्निदेव का प्रथम पुत्र जानकर सब देवता उनके पास आए और इसका कारण पूछने लगे॥19॥ |
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| Bharatanandan! Knowing Angira to be the first son of Agnidev, all the gods came to him and started asking the reason for this.॥ 19॥ |
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