Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.215.7-8: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! तुमने अपने माता-पिता की उपेक्षा की है। उनकी आज्ञा लिए बिना ही तुम वेदों का अध्ययन करने के लिए घर छोड़कर चले गए हो। हे निंद्य ब्राह्मण! तुमने अनुचित कार्य किया है। तुम्हारे दुःख से ये वृद्ध एवं तपस्वी माता-पिता दोनों अंधे हो गए हैं। | mahabharat अध्याय 3.215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया विनिकृता माता पिता च द्विजसत्तम।
अनिसृष्टोऽसि निष्क्रान्तो गृहात् ताभ्यामनिन्दित॥ ७॥
वेदोच्चारणकार्यार्थमयुक्तं तत् त्वया कृतम्।
तव शोकेन वृद्धौ तावन्धीभूतौ तपस्विनौ॥ ८॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! तुमने अपने माता-पिता की उपेक्षा की है। उनकी आज्ञा लिए बिना ही तुम वेदों का अध्ययन करने के लिए घर छोड़कर चले गए हो। हे निंद्य ब्राह्मण! तुमने अनुचित कार्य किया है। तुम्हारे दुःख से ये वृद्ध एवं तपस्वी माता-पिता दोनों अंधे हो गए हैं।
O best Brahmin! You have neglected your parents. You have left home to study the Vedas without taking their permission. O reprehensible Brahmin! You have committed an inappropriate act. Both these old and ascetic parents have become blind due to your grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥