व्याध उवाच
यत् तदा त्वं द्विजश्रेष्ठ तयोक्तो मां प्रति प्रभो।
दृष्टमेव तया सम्यगेकपत्न्या न संशय:॥ ५॥
अनुवाद
धर्मव्याध ने कहा - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! हे प्रभु! उस पतिव्रता स्त्री ने मेरे विषय में जो कुछ पहले आपसे कहा है, वह सत्य है। इसमें कोई संदेह नहीं कि उसने अपने पतिव्रता धर्म के प्रभाव से सब कुछ प्रत्यक्ष देखा है।॥5॥
Dharmavyadh said - O best of Brahmins! O Lord! Whatever that faithful lady has told you earlier about me is correct. There is no doubt that she has seen everything directly due to the effect of her fidelity towards her husband. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥