श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.215.22 
अहं हि ब्राह्मण: पूर्वमासं द्विजवरात्मज:।
वेदाध्यायी सुकुशलो वेदाङ्गानां च पारग:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पूर्वजन्म में मैं एक श्रेष्ठ ब्राह्मण का पुत्र था और वेदों के अध्ययन में तत्पर ब्राह्मण था। मुझे वेदों का पारंगत विद्वान माना जाता था। मैं ज्ञान के अध्ययन में अत्यन्त कुशल था।
 
In my previous life, I was the son of a great Brahmin and a Brahmin devoted to the study of Vedas. I was considered an expert scholar of the Vedas. I was very skilled in the study of knowledge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)