एको नरसहस्रेषु धर्मविद् विद्यते न वा।
प्रीतोऽस्मि तव सत्येन भद्रं ते पुरुषर्षभ॥ १५॥
अनुवाद
यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि सहस्रों मनुष्यों में एक भी ऐसा है जो धर्म के तत्त्व को जानता है या नहीं । पुरुषर्षभ ! तुम्हारा कल्याण हो । आज मैं तुम्हारे सत्यनिष्ठा के कारण तुम पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ ॥ 15॥
It cannot be said with certainty whether there is even one among thousands of people who knows the essence of religion or not. Purusharshabha! May you be blessed. Today I am very pleased with you because of your truthfulness.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥