Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.215.12: धर्मव्याध ने कहा - हे ब्रह्मन्! तुम देवताओं के समान हो, क्योंकि तुमने उस धर्म में अपना मन लगाया है जो प्राचीन है, सनातन है, दिव्य है और उन मनुष्यों के लिए दुर्लभ है जो अपने मन को जीत नहीं सकते।   |   mahabharat अध्याय 3.215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 215: धर्मव्याधका कौशिक ब्राह्मणको माता-पिताकी सेवाका उपदेश देकर अपने पूर्वजन्मकी कथा कहते हुए व्याध होनेका कारण बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.215.12 
व्याध उवाच
दैवतप्रतिमो हि त्वं यस्त्वं धर्ममनुव्रत:।
पुराणं शाश्वतं दिव्यं दुष्प्राप्यमकृतात्मभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
धर्मव्याध ने कहा - हे ब्रह्मन्! तुम देवताओं के समान हो, क्योंकि तुमने उस धर्म में अपना मन लगाया है जो प्राचीन है, सनातन है, दिव्य है और उन मनुष्यों के लिए दुर्लभ है जो अपने मन को जीत नहीं सकते।
 
Dharmavyadha said - Brahmin! You are like the gods because you have devoted your mind to that religion which is ancient, eternal, divine and is rare for men who cannot conquer their mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)