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mahabharat 3.213.8: जब वही प्राण प्रयत्न (कार्य करने का प्रयत्न), कर्म (उत्सर्जन और गति आदि) और बल (भार उठाने की शक्ति) इन तीन विषयों में लग जाता है, तब अध्यात्मवेत्ता उसे उदान कहते हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.213.8 
प्रयत्ने कर्मणि बले स एष त्रिषु वर्तते।
उदानमिति तं प्राहुरध्यात्मविदुषो जना:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब वही प्राण प्रयत्न (कार्य करने का प्रयत्न), कर्म (उत्सर्जन और गति आदि) और बल (भार उठाने की शक्ति) इन तीन विषयों में लग जाता है, तब अध्यात्मवेत्ता उसे उदान कहते हैं ॥8॥
 
When the same Prana gets engaged in these three subjects – effort (attempt to work), karma (emission and movement etc.) and force (power to lift the burden), then spiritualists call it Udaan. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)