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mahabharat 3.213.39: जो मनुष्य दुःख और सुख दोनों का त्याग कर देता है, वह शाश्वत ब्रह्मपद को प्राप्त करता है। अनासक्ति से भी वही पद प्राप्त होता है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.213.39 
परित्यजति यो दु:खं सुखं चाप्युभयं नर:।
ब्रह्म प्राप्नोति सोऽत्यन्तमसङ्गेन च गच्छति॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य दुःख और सुख दोनों का त्याग कर देता है, वह शाश्वत ब्रह्मपद को प्राप्त करता है। अनासक्ति से भी वही पद प्राप्त होता है ॥39॥
 
The person who gives up both sorrow and happiness attains eternal Brahmapada. The same medal is achieved through non-attachment also. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)