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mahabharat 3.213.36: इस लोक और परलोक के समस्त सुखों तथा सब प्रकार के संग्रहों को त्यागकर, दुःखरहित परमधाम को अपना लक्ष्य बनाओ तथा बुद्धि के द्वारा मन और इन्द्रियों को वश में करो ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 3.213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.213.36 
परिग्रहं परित्यज्य भवेद् बुद्धॺा यतव्रत:।
अशोकं स्थानमाश्रित्य निश्चलं प्रेत्य चेह च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इस लोक और परलोक के समस्त सुखों तथा सब प्रकार के संग्रहों को त्यागकर, दुःखरहित परमधाम को अपना लक्ष्य बनाओ तथा बुद्धि के द्वारा मन और इन्द्रियों को वश में करो ॥36॥
 
Renounce all the pleasures of this world and the next and all kinds of accumulations and make the sorrow-free Supreme Abode your aim and control the mind and the senses through the intellect. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)