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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 213: प्राणवायुकी स्थितिका वर्णन तथा परमात्म-साक्षात्कारके उपाय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.213.32 
यस्य सर्वे समारम्भा निराशीर्बन्धना: सदा।
त्यागे यस्य हुतं सर्वं स त्यागी स च बुद्धिमान्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जिसकी सम्पूर्ण योजना कामनाओं से बंधी नहीं है और जिसने अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को त्याग की अग्नि में स्वाहा कर दिया है, वही बुद्धिमान् और त्यागी है। 32.
 
He whose entire planning is not bound by desires and who has sacrificed his entire being in the fire of renunciation is a wise and renunciant person. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)