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mahabharat 3.210.20: इनके अतिरिक्त पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, प्राण और सत्व, रज, तम - इन सत्रह तत्त्वों के समूह को अव्यक्त कहते हैं ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 3.210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 210: विषयसेवनसे हानि, सत्संगसे लाभ और ब्राह्मी विद्याका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.210.20 
इन्द्रियाणि च पञ्चात्मा रज: सत्त्वं तमस्तथा।
इत्येष सप्तदशको राशिरव्यक्तसंज्ञक:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, प्राण और सत्व, रज, तम - इन सत्रह तत्त्वों के समूह को अव्यक्त कहते हैं ॥20॥
 
Apart from these, five sense organs, Prana and Sattva, Raja, Tama – the group of these seventeen elements is called Avyakta. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)