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mahabharat 3.207.86-87h: जो महापुरुष न्यायप्रिय, सदाचारी, सब लोगों के हितैषी, अहिंसक और सन्मार्ग पर चलने वाले हैं, वे स्वर्ग को जीत लेते हैं। 86 1/2   |   mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन  »  श्लोक 86-87h
 
 
श्लोक  3.207.86-87h 
न्यायोपेता गुणोपेता: सर्वलोकहितैषिण:॥ ८६॥
सन्त: स्वर्गजित: शुक्ला: संनिविष्टाश्च सत्पथे।
 
 
अनुवाद
जो महापुरुष न्यायप्रिय, सदाचारी, सब लोगों के हितैषी, अहिंसक और सन्मार्ग पर चलने वाले हैं, वे स्वर्ग को जीत लेते हैं। 86 1/2
 
Those great men who are just, virtuous, well wishers of all people, are non-violent and follow the right path, conquer the heaven. 86 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)