Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.207.78: जो क्रोध से रहित हैं, जो दूसरों के दोष नहीं देखते, जो अहंकार और ईर्ष्या से मुक्त हैं, जो सरल और आत्मसंयम से युक्त हैं, वे ही शिष्ट कहलाते हैं। | mahabharat अध्याय 3.207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो क्रोध से रहित हैं, जो दूसरों के दोष नहीं देखते, जो अहंकार और ईर्ष्या से मुक्त हैं, जो सरल और आत्मसंयम से युक्त हैं, वे ही शिष्ट कहलाते हैं।
Those who are free from anger, who do not see the faults of others, who are free from ego and jealousy, who are simple and endowed with self-control, are called well-mannered. 78.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥