vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 207: कौशिकका धर्मव्याधके पास जाना, धर्मव्याधके द्वारा पतिव्रतासे प्रेषित जान लेनेपर कौशिकको आश्चर्य होना, धर्मव्याधके द्वारा वर्णधर्मका वर्णन, जनकराज्यकी प्रशंसा और शिष्टाचारका वर्णन
»
श्लोक 60
श्लोक
3.207.60
मार्कण्डेय उवाच
स तु विप्रो महाप्राज्ञो धर्मव्याधमपृच्छत।
शिष्टाचारं कथमहं विद्यामिति नरोत्तम॥ ६०॥
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं - युधिष्ठिर ! तत्पश्चात् परम बुद्धिमान कौशिक ने धर्मव्याध से पूछा - 'पुरुषश्रेष्ठ ! मैं शिष्टाचार कैसे जानूँ ?' 60॥
Markandeyaji says – Yudhishthir! Thereafter, the most intelligent Kaushik asked Dharmavyadha – 'Best of men! How do I know etiquette? 60॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas